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क्यों नहीं खुली नेताजी की मिस्ट्री?

सुभाष चंद्र बोस पर आयोजित व्याख्यान में उठाए गए कई सवाल

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ करते अनुज धर व रविंद्र तिवारी।

आगरा। सोवियत रूस, ब्रिटेन, जापान और भारतीय इन्टेलिजेंस की रिपोर्ट, सरकारी दस्तावेज व अन्य तथ्यात्मक सबूतों के आधार पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मिस्ट्री उजागर हुई तो तत्कालीन कई प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति भी लपेटे में होंगे। आखिर क्या कारण रहे कि वर्ष 1940 में देश से गए सुभाष चंद बोस के प्लेन क्रेश, हत्या और गुमनामी जैसी अलग-अलग थ्योरी पर भारतीय सरकार अंतिम नतीजे पर आज तक नहीं पहुंच सकी। भंवरी देवी के केस के लिए अमेरिका में जांच कराई जा सकती है तो जापान में मौजूद नेताजी की अस्थियां जो भारत के कब्जे में हैं, का डीएनए टेस्ट आज तक क्यों नहीं कराया गया। यह सवाल थे इनवेस्टिगेटिव पत्रकार व आॅथर अनुज धर के। उन्होंने लगभग 15 वर्ष के अपने शोध कार्य व 50 से अधिक सरकारी सबूतों के साथ नेताजी की मिस्ट्री की परतों को शहरवासियों के समक्ष पर्त दर पर्त खोला।
इंडिक एकेडमी द्वारा कमला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित अनुज धर के आख्यान ‘मिस्ट्री बिहाइंड द डिसएपियरेन्स आॅफ सुभाष चंद बोस’ विषय पर यह बातें रखीं। कहा कि जब-जब कांग्रेस की सरकार के अलावा कोई भी सरकार आ तभी नेताजी की फिल कुछ आगे बढ़ सकी। वीपी सिंह की सरकार के दौरान पहली बार भारत ने रूस से नेताजी के बारे में जानकारी प्राप्त करने की पहल की। वर्ष 2010 में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नेताजी मिस्ट्री से जुड़े के 70 हजार पन्नों में से मजबूरन 10 हजार पन्ने रिलीज करने वाली सरकार गलती से कुछ ऐसे पन्ने रिलीज कर बैठी जो वह छुपाना चाहती थी। वर्ष 2014 में पब्लिक हुए दस्तावेज से पता चला कि छोटे-छोटे बच्चों से लेकर नेताजी के परिवार और हर उस व्यक्ति की जासूसी की जा रही थी, जिस पर नेताजी से जुड़ने का शक था। यह सब जानकारी ब्रिटेन को उपलब्ध कराई जाती थी। सरकार ने वर्ष 2005 में कोई कारण बताए बिना आखिर मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को क्यों खारिज किया। नेताजी के प्लेन क्रेश की बात को ताइवान इंटेलिजेंस नकार चुकी है। जापान में मौजूद नेताजी की हड्डियों का डीएनए टेस्ट इसलिए नहीं कराया गया क्योंकि लॉ एंड आॅर्डर की परेशानी विशेषकर बंगाल में होने का खतरा था।
उन्होंने बताया कि फैजाबाद में गुप्तारघाट जहां श्रीराम ने समाधि ली थी, वहीं पास ही नेताजी की भी समाधि है। जहां वर्ष 1983 में उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार किया गया था।
इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रविन्द्र तिवारी ने किया। संचालन ठाकुर सिंह व धन्यवाद ज्ञापन विकास सारस्वत ने दिया।

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